बृहस्पति को बलवान करने के लिए पीला पुखराज धारण करने की सही वैदिक विधि
पीला पुखराज (Yellow Sapphire) का ज्योतिषीय महत्व
वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, धन, संतान, धर्म और वैवाहिक सुख के मुख्य कारक हैं। यदि जन्मकुंडली में गुरु कमजोर, अस्त या पीड़ित हो, तो जातक के विवाह में विलंब, आर्थिक तंगी और निर्णय क्षमता में बाधा आती है।
धारण करने का शुभ दिन व नक्षत्र
पुखराज हमेशा शुक्ल पक्ष के गुरुवार (Thursday) को सूर्योदय के उपरांत गुरु की होरा में धारण करना चाहिए। यदि उस दिन पुष्य, पुनर्वसु या विशाखा नक्षत्र हो तो इसका प्रभाव सौ गुना बढ़ जाता है।
मंत्र व धारण धातु
पुखराज को 22K/18K स्वर्ण (Gold) या अष्टधातु में तर्जनी उंगली (Index finger) में धारण करना चाहिए। गंगाजल और कच्चे दूध से स्नान कराकर 108 बार "ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः" मंत्र का जाप करना अनिवार्य है।
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